
शास्त्रों के अनुसार मनुष्य का मस्तिक प्रधान होता है: पंडित रामकिशोर शास्त्री महाराज जी
चित्रकूट/ पहाड़ी सिधौली गांव स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में आयोजित नव दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को कथा व्यास आचार्य रामकिशोर शास्त्री महाराज जी ने कहा कि मनुष्यों का क्या कर्तव्य है इसका बोध भागवत सुनकर ही होता है। विडंबना ये है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं। निस्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले लोग अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं।
कथा व्यास ने कहा कि प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है। जबकि शरीर नश्वर है। उन्होंने कहा कि भागवत बताता है कि कर्म ऐसा करो जो निस्काम हो वहीं सच्ची भक्ति है।
इस मौके पर आयोजक विश्वनाथ राजपूत, ग्राम प्रधान भानपुर शिवचरण अवस्थी, सुशील द्विवेदी, विक्रम राजपूत, आदि काफी संख्या मे श्रद्धालु मौजूद रहे।



