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चित्रकूट,ब्यूरो। एक ओर योगी आदित्यनाथ प्रदेश भर में तालाबों और सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के सख्त निर्देश दे रहे हैं

मंदिर रोड स्थित सरकारी भूमि पर निर्माण का आरोप

चित्रकूट,ब्यूरो। एक ओर योगी आदित्यनाथ प्रदेश भर में तालाबों और सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के सख्त निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चित्रकूट जनपद की कर्वी तहसील के ग्राम अकबरपुर (ब) में राजस्व विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। यहां तालाब के भीटे की बेशकीमती सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कराए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।

– मंदिर रोड स्थित सरकारी भूमि पर निर्माण का आरोप

मामला कर्वी तहसील क्षेत्र के ग्राम अकबरपुर (ब) का है। ग्रामीणों के अनुसार मंदिर रोड स्थित मेन रोड से लगी तालाब की सरकारी जमीन पर दबंगों द्वारा अवैध निर्माण कराया जा रहा है। आरोप है कि संबंधित क्षेत्र के लेखपाल की मिलीभगत से यह कब्जा संभव हो पाया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की जानकारी उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को भी दी जा चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य पर अब तक प्रभावी रोक नहीं लग सकी है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रशासनिक आदेशों का पालन जमीनी स्तर पर क्यों नहीं हो रहा।

– “ऊपर तक सेटिंग” की चर्चा, अधिकारियों का नहीं भय

सूत्रों की मानें तो संबंधित लेखपाल की “सेटिंग” लखनऊ सचिवालय तक होने की चर्चा है। यही वजह बताई जा रही है कि उसे जिले के अधिकारियों का भी कोई भय नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी लेखपाल से अवैध कब्जे के संबंध में बात की जाती है तो वह यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि “एसडीएम को बता दिया गया है।”

करीब एक माह पूर्व ग्राम अकबरपुर के ग्राम प्रधान पति ने लगभग 100 से 150 ग्रामीणों के साथ लेखपाल के खिलाफ तहसील परिसर में प्रदर्शन भी किया था, लेकिन उसके बाद भी संबंधित लेखपाल के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।

– सुविधा शुल्क लेकर खुली छूट देने के आरोप

ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि कुछ राजस्व कर्मियों द्वारा सुविधा शुल्क लेकर अवैध निर्माण को खुली छूट दी जाती है। आरोप यह भी है कि जब निर्माण कार्य पूर्ण हो जाता है, तब औपचारिकता के तौर पर धारा 67 की कार्रवाई का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जाता है।

यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह न केवल सरकारी जमीन की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न है, बल्कि शासन की मंशा पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

– “सैया भये कोतवाल…” जैसी स्थिति

ग्रामवासियों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई की जाए तो कोई भी व्यक्ति सरकारी जमीन पर कब्जा करने की हिम्मत नहीं करेगा। उनका आरोप है कि कुछ कर्मचारी उच्च अधिकारियों को गुमराह कर मामले में लीपापोती कर देते हैं। ऐसे में कहावत चरितार्थ होती दिख रही है—“सैया भये कोतवाल तो डर काहे का।”

– अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

जनपद के जागरूक नागरिकों की निगाहें अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और चित्रकूट के जिलाधिकारी की ओर टिकी हैं। देखना यह होगा कि सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए प्रशासन कब तक ठोस कदम उठाता है।

यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला शासन की मंशा और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

✍️ चित्रकूट से राम-लखन पाण्डेय की रिपोर्ट

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