*ओठगी तरहार पंचायत में विकास के नाम पर सवाल ही सवाल, पाँच साल का हिसाब तलब — अधूरा अमृत सरोवर, फटी गौशाला की दीवारें, खर्च पर उठे गंभीर आरोप*
*सूचना अधिकार की रजिस्ट्री पहुंचते ही बढ़ी हलचल, आधे-अधूरे कामों पर घिरी पंचायत — बारीकी से जांच हुई तो खुल सकती हैं कई परतें*

लालापुर/ओठगी,प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र की बारा तहसील अंतर्गत विकासखंड शंकरगढ़ की ग्राम पंचायत ओठगी तरहार में वर्ष दो हजार बीस से वर्ष दो हजार पच्चीस तक कराए गए विकास कार्यों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम पंचायत में खर्च हुई धनराशि, कराए गए निर्माण कार्यों और उनकी गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी क्रम में गांव निवासी मंगला प्रसाद तिवारी द्वारा जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन दाखिल कर पंचायत में हुए सभी विकास कार्यों का पूरा आय-व्यय विवरण मांगा गया है। यह आवेदन डाक विभाग के माध्यम से रजिस्ट्री द्वारा जन सूचना अधिकारी, पंचायत विकासखंड शंकरगढ़ को भेजा गया है। आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि रजिस्ट्री प्राप्त होने के पश्चात निर्धारित समय-सीमा के भीतर वर्ष दो हजार बीस से वर्ष दो हजार पच्चीस तक ग्राम पंचायत में कराए गए समस्त विकास कार्यों की स्वीकृत धनराशि, खर्च की गई रकम तथा कराए गए कार्यों का पूरा लेखा-जोखा उपलब्ध कराया जाए, ताकि हर कार्य की बारीकी से जांच की जा सके। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कई विकास कार्य कागजों में पूरे दिखाए गए, जबकि धरातल पर स्थिति कुछ और ही है। गांव में बना अमृत सरोवर आज भी अधूरा पड़ा हुआ है, जबकि इस पर खर्च दर्शाया जा चुका है। इसी प्रकार गौशाला निर्माण कार्य को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि गौशाला के निर्माण में घोर वित्तीय अनियमितता हुई है और निर्माण कार्य केवल नाम मात्र का कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला की नींव में घटिया बालू का प्रयोग किया गया, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता शुरू से ही संदिग्ध रही। हालत यह है कि गौशाला की दीवारें कई जगह से फट चुकी हैं और निर्माण की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि निर्माण कार्य मानक के अनुसार कराया जाता तो इतनी जल्दी दीवारों में दरारें नहीं पड़तीं। गांव के लोगों का कहना है कि पंचायत में सड़क,नाली, खड़ंजा, शौचालय, आवास, सामुदायिक भवन, अमृत सरोवर, गौशाला सहित कई योजनाओं में लाखों रुपये खर्च दिखाए गए हैं, लेकिन कई कार्य अधूरे पड़े हैं, कुछ की गुणवत्ता खराब है और कुछ कामों का सही रिकॉर्ड गांव वालों को नहीं बताया गया। ग्रामीणों का मानना है कि यदि सक्षम अधिकारियों द्वारा हर पहलू और हर एंगल से निष्पक्ष और बारीकी से जांच कराई गई तो कई परतें खुल सकती हैं और यह भी सामने आ सकता है कि किन कार्यों में कितना पैसा खर्च हुआ और कहाँ गड़बड़ी हुई। आवेदक मंगला प्रसाद तिवारी, निवासी (गिधार)ओठगी तरहार, ने मांग की है कि समय-सीमा के भीतर पूरा आय-व्यय विवरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि ग्राम पंचायत में हुए सभी विकास कार्यों की सही तरीके से जांच हो सके। सूचना अधिकार की रजिस्ट्री पहुंचने के बाद पंचायत स्तर पर हलचल तेज बताई जा रही है। अब पूरे क्षेत्र की नजर इस बात पर टिकी है कि संबंधित अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं, क्योंकि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो ओठगी तरहार पंचायत के विकास कार्यों का पूरा सच सामने आ सकता है।




