खाकी के साये में ‘अन्याय’: सुरसा पुलिस पर महिला के गंभीर आरोप, मुख्यमंत्री दरबार को भी गुमराह करने का दावा
हरदोई। उत्तर प्रदेश में जहाँ एक ओर जीरो टॉलरेंस की नीति का ढिंढोरा पीटा जा रहा है,
हरदोई। उत्तर प्रदेश में जहाँ एक ओर जीरो टॉलरेंस की नीति का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहीं हरदोई के सुरसा थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जो पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक बेबस महिला ने सुरसा पुलिस पर अपने पति और बेटे को झूठे मुकदमों में फंसाने और दबंगों से सांठगांठ कर संपत्ति कब्जाने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।”दहशत के साये में परिवार पीड़िता का आरोप है कि पुलिस के खौफ ने उसके परिवार की कमर तोड़ दी है। वर्दी देखते ही परिवार की रूह कांप जाती है।महिला वा उसके पति मीडिया के सामने बोला उसके पति और बेटे को साजिश के तहत जेल भेजा गया।क्षेत्रीय दबंगों को उसकी बेशकीमती संपत्ति पर अवैध कब्जा दिलवाया गया।सेमरा चौराहे पर स्थित पति की सोने-चांदी की दुकान को पुलिसिया प्रताड़ना के जरिए बंद करने पर मजबूर किया गया।
“हम गरीब हैं, इसलिए हमें कुचला जा रहा है। पुलिस आए दिन घर आकर प्रताड़ित करती है। अब हमारे पास खाने तक के पैसे नहीं बचे हैं।”
मामला और भी गंभीर तब हो जाता है जब पीड़िता बताती है कि उसने न्याय के लिए मुख्यमंत्री दरबार का दरवाजा खटखटाया। वहाँ से जांच के आदेश भी आए, लेकिन आरोप है कि सुरसा थाना पुलिस ने गलत आख्या (रिपोर्ट) लगाकर शासन को भी गुमराह कर दिया। जिला प्रशासन के अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल तक, हर जगह से पीड़िता को अब तक सिर्फ आश्वासन और प्रताड़ना ही मिली है।पीड़िता ने अब उच्चाधिकारियों से हाथ जोड़कर निष्पक्ष जांच की याचना की है। महिला की आंखों के आंसू सिस्टम की विफलता की कहानी बयां कर रहे हैं।क्या हरदोई पुलिस के आला अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे?
क्या मुख्यमंत्री को भेजी गई ‘गलत आख्या’ की जांच होगी?
क्या एक गरीब परिवार को दबंगों और खाकी के इस कथित गठजोड़ से मुक्ति मिलेगी?
फिलहाल, मामला ठंडे बस्ते में है या पुलिस अपनी साख बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी, यह आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन एक बात साफ है—अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए






