*मौत का गड्ढा या प्रशासन की नींद? शंकरगढ़ की सड़क पर हर दिन लटक रही ज़िंदगी*
*महीनों से बना जानलेवा गड्ढा, जिम्मेदार खामोश — हादसे का इंतज़ार या सिस्टम की लापरवाही?*

*मौत का गड्ढा या प्रशासन की नींद? शंकरगढ़ की सड़क पर हर दिन लटक रही ज़िंदगी*
शंकरगढ़,प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत शंकरगढ़ विकासखंड की एक सड़क इन दिनों प्रशासनिक उदासीनता की जीती-जागती मिसाल बन चुकी है। शिवराजपुर से प्रतापपुर की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर बना एक विशाल गड्ढा सीधे- सीधे मौत को दावत दे रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। यह गड्ढा कोई छोटा-मोटा खड्डा नहीं, बल्कि इतना गहरा और चौड़ा है कि भारी वाहन भी इसके सामने बेबस नजर आते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, जब भी कोई ट्रक या भारी वाहन इस रास्ते से गुजरता है, तो वह असंतुलित होकर एक तरफ झुक जाता है। जरा सी चूक और बड़ा हादसा तय है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? बुधवार को जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची, तो हालात देखकर खुद हैरान रह गई। सड़क की हालत इतनी बदतर है कि आम राहगीरों से लेकर वाहन चालकों तक में दहशत का माहौल है। आसपास के दुकानदारों और ग्रामीणों ने बताया कि यह गड्ढा आज या कल का नहीं, बल्कि कई महीनों से इसी तरह बना हुआ है। शिकायतें भी की गईं, लेकिन नतीजा शून्य रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस गड्ढे को ठीक नहीं कराया गया, तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है, जिसमें कई लोगों की जान भी जा सकती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिरकार लोक निर्माण विभाग, तहसील प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही? या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? अब देखना यह होगा कि खबर के प्रकाशन के बाद प्रशासन हरकत में आता है या फिर किसी अनहोनी के बाद वही पुराना राग — “जांच के आदेश दे दिए गए हैं” — सुनने को मिलेगा। फिलहाल, शंकरगढ़ की यह सड़क प्रशासन की संवेदनहीनता और लापरवाही की पोल खोल रही है।




