प्रयागराज हथिगनी ग्राम सभा में संचालित शंकर सेठ ईंट भट्ठों पर नाबालिग के मजदूरी का खेल! कानून बेअसर, बच्चों का बचपन धुएं में
धधकते भट्ठों में झुलस रहा बचपन, जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर सवाल

धधकते भट्ठों में झुलस रहा बचपन, जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर सवाल


हाल ही में एक किशोर मजदूर की दर्दनाक मौत के बाद भट्ठों पर काम करने वाले नाबालिग बच्चों की सुरक्षा और उनके शोषण का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। सवाल यह है कि जब श्रम विभाग, प्रशासन और पुलिस की नियमित निगरानी की व्यवस्था है तो फिर नाबालिग बच्चों की मौजूदगी भट्ठों तक कैसे पहुंच रही है?
विशेषज्ञों के मुताबिक शंकर ईंट भट्ठों पर काम करने वाले बच्चे शिक्षा से दूर होकर शारीरिक और मानसिक शोषण का शिकार होते हैं। धूल, धुआं और भारी श्रम उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई भट्ठा संचालक सस्ते श्रम के लालच में नाबालिगों से काम करवा रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के बजाय आंखें मूंदे बैठे हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो न जाने कितने बच्चों का बचपन और भविष्य इन भट्ठों की आग में जलता रहेगा।
अब देखना होगा कि प्रशासन बाल श्रम के खिलाफ अभियान चलाकर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मुद्दा भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
प्रयागराज मंडल ब्यूरो चीफ देव कृष्ण द्विवेदी की कलाम से✍️




